उत्तराखण्ड

देहरादून महायोजना-2041: देहरादून के भविष्य पर फिर सुनी जाएगी जनता की आवाज, ताकि कोई भी व्यक्ति अपनी बात रखने से वंचित न रहे, 28 जुलाई से 4 अगस्त तक एमडीडीए कार्यालय में दर्ज होंगे महायोजना-2041 पर सुझाव और आपत्तियां

देहरादून। देहरादून की विकास यात्रा को वर्ष 2041 तक नई दिशा देने वाली महायोजना-2041 में आम जनता की भागीदारी को और मजबूत बनाने के लिए मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने एक और बड़ा फैसला लिया है। सेक्टरवार जनसुनवाई का चरण पूरा होने के बाद अब आम नागरिकों को दोबारा अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर दिया जाएगा। 28 जुलाई से 4 अगस्त 2026 तक प्रतिदिन प्रातः 11 बजे से अपराह्न 2 बजे तक ट्रांसपोर्ट नगर स्थित एमडीडीए कार्यालय के सभागार में विशेष जनसुनवाई आयोजित होगी, जहां कोई भी इच्छुक नागरिक महायोजना-2041 के प्रारूप पर अपनी राय रख सकेगा।

एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी का मानना है कि राजधानी की भावी तस्वीर केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि जनभागीदारी से तय होगी। यही कारण है कि 6 जुलाई से 21 जुलाई तक विभिन्न सेक्टरों में आयोजित जनसुनवाई के बाद अब एक अतिरिक्त अवसर उपलब्ध कराया गया है, ताकि कोई भी व्यक्ति अपनी बात रखने से वंचित न रहे।

जनता के सुझावों से तय होगी राजधानी की दिशा
महायोजना-2041 का उद्देश्य देहरादून को वर्ष 2041 तक एक सुनियोजित, आधुनिक, सुरक्षित और पर्यावरणीय दृष्टि से संतुलित राजधानी के रूप में विकसित करना है। प्रस्तावित योजना में सड़क नेटवर्क, यातायात व्यवस्था, आवासीय एवं व्यावसायिक क्षेत्र, सार्वजनिक सुविधाएं, जल निकासी, हरित क्षेत्र, पर्यावरण संरक्षण, पार्किंग, जलापूर्ति और भविष्य की जनसंख्या को ध्यान में रखते हुए आधारभूत ढांचे के विकास का व्यापक खाका तैयार किया गया है। एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी का कहना है कि अंतिम महायोजना तैयार करने से पहले प्रत्येक सुझाव और आपत्ति का तकनीकी एवं विधिक परीक्षण किया जाएगा, ताकि विकास का मॉडल स्थानीय आवश्यकताओं और जनभावनाओं के अनुरूप बनाया जा सके।

मिला व्यापक जनसमर्थन
महायोजना-2041 के तहत आयोजित सेक्टरवार जनसुनवाई अभियान में क्षेत्र के नागरिकों, भू-स्वामियों, शिक्षाविदों, व्यापारिक संगठनों और सामाजिक प्रतिनिधियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।जनसुनवाई के दौरान सबसे अधिक चर्चा तेजी से बढ़ते शहरीकरण और उससे उत्पन्न चुनौतियों पर हुई। प्रतिभागियों ने चंद्रबनी, मोहकमपुर और शिमला बाईपास क्षेत्र में बढ़ते यातायात दबाव को कम करने के लिए सड़क नेटवर्क मजबूत करने, सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाने, पर्याप्त पार्किंग विकसित करने तथा भविष्य की जरूरतों के अनुरूप नए संपर्क मार्ग तैयार करने के सुझाव दिए।इसके साथ ही जलापूर्ति, सीवरेज, ड्रेनेज, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और नागरिक सुविधाओं के विस्तार को महायोजना का अभिन्न हिस्सा बनाने पर भी जोर दिया गया।

हरित दून की पहचान बचाने की मांग
जनसुनवाई में पर्यावरण संरक्षण सबसे महत्वपूर्ण विषयों में शामिल रहा। नागरिकों ने वर्षा जल संचयन, भूजल संरक्षण, प्राकृतिक जल स्रोतों की सुरक्षा, हरित क्षेत्रों के विस्तार और खुले सार्वजनिक स्थलों को संरक्षित रखने की मांग की। प्रतिभागियों का कहना था कि देहरादून की पहचान उसकी प्राकृतिक हरियाली और पर्यावरणीय विरासत से है, इसलिए विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखना महायोजना की सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।

स्थानीय जरूरतों के अनुरूप बने विकास मॉडल
भूमि उपयोग, विकास नियंत्रण नियमों और संस्थागत विकास को लेकर भी कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए। लोगों ने कहा कि राजधानी के प्रत्येक क्षेत्र की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियां अलग हैं, इसलिए विकास मॉडल भी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया जाना चाहिए। एमडीडीए अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि प्राप्त सभी सुझावों का गंभीरता से अध्ययन कर अंतिम प्रारूप में उचित स्थान दिया जाएगा।

एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि देहरादून महायोजना-2041 केवल भवनों और सड़कों की योजना नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों की राजधानी का समग्र विजन है। उन्होंने कहा कि जनसुनवाई के दौरान नागरिकों से मिल रहे सुझाव योजना को अधिक व्यवहारिक, जनोन्मुखी और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विकास, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक सुविधाओं के बीच संतुलन स्थापित करना महायोजना का मूल उद्देश्य है। इसी सोच के तहत जनता को पुनः सुझाव देने का अवसर दिया जा रहा है। उन्होंने सभी नागरिकों से अधिकाधिक संख्या में भाग लेकर देहरादून के सुनियोजित भविष्य के निर्माण में सहयोग करने की अपील की।

एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि जनसुनवाई के दौरान प्राप्त प्रत्येक सुझाव और आपत्ति का व्यवस्थित अभिलेखीकरण किया जा रहा है। विशेषज्ञों की टीम तकनीकी, विधिक और व्यावहारिक पहलुओं के आधार पर उनका परीक्षण करेगी। उन्होंने कहा कि महायोजना का उद्देश्य केवल शहरी विस्तार नहीं, बल्कि नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार करना है। इसलिए सभी सुझावों को गंभीरता से अंतिम प्रारूप में शामिल करने पर विचार किया जाएगा।

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